12 जुलाई 2020 - 15:25
ज़ायोनी शासन बिखर रहा है और 72 देशों से इस्राईल पलायन करने वाले ज़ायोनियों का सपना चकनाचूर हो रहा है, इस्राईली विपक्षी नेता

इस्राईली संसद क्नेसेट में विपक्षी नेता याइर लैपिड (Ya'ir Lapid) ने चेतावनी दी है कि मौजूदा आर्थिक संकट, इस्राईल में व्यापक विद्रोह का कारण बन सकता है।

रॉयर्ज़ की रिपोर्ट के मुताबिक़, लैपिड का कहना था कि लोग बहुत ही मायूस और क्रोधित हैं, इसलिए कि जो सपना लेकर वह अपने अपने मूल देशों से इस्राईल पहुंचे थे, वह अब टूट रहा है।

इस्राईली संसद में प्रमुख विपक्षी नेता का कहना था कि इस्राईल अपने सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है और परिस्थितियां बहुत संकटमय हैं।

इस्राईल के टीवी चैनल-7 द्वारा कराए गए ताज़ा सर्वे में 50 प्रतिशत से अधिक लोगों का मानना है कि मौजूदा आर्थिक संकट और कोरोना महामारी से निपटने में नाकामी के लिए ज़ायोनी प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ज़िम्मेदार हैं।

लेकिन समस्या सिर्फ़ यहीं तक सीमित नहीं है। इस्राईली मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, 1948 में इस्राईल के अवैध रूप से वजूद में आने के बाद से जिन ज़ायोनियों ने दुनिया के 72 देशों से इस्राईल को अपना वतन समझकर पलायन किया है, वह अब इसके भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में हैं।

इस्राईली मीडिया रिपोर्टों में पेश किए जाने वाले आकड़ों के मुताबिक़, 70 और 80 के दशकों में 70 से 80 फ़ीसद ज़ायोनी बेहतर भविष्य को लेकर आशावादी थे। लेकिन आज 50 फ़ीसद से ज़्यादा ज़ायोनी इस्राईल के भविष्य लेकर निराश हैं। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार ज़ायोनी शासन को दीमक की चरह चाट रहा है, दूसरी ओर क्षेत्रीय इस्लामी प्रतिरोधी संगठन दिन प्रतिदिन मज़बूत हो रहे हैं।

8 लाख इस्राईली नागरिक दूसरे देशों को पलायन कर चुके हैं और वे वापस लौटने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन ज़ायोनी शासन उन्हें आज भी इस्राईली नागरिक मानकर उन्हें इस्राईली आबादी का हिस्सा बताता है।

इसके अलावा, इस्राईल के 33 फ़ीसद नागरिकों को पास दोहरी नागरिकता है और वे अपनी दूसरी नागरिकता को त्यागने के लिए तैयार नहीं हैं। इसका एक मुख्य कारण लोगों में असुरक्षा का अहसास है।

इस्राईल की राष्ट्रीय सुरक्षा शोध संस्था के आकड़ों के मुताबिक़, 50 फ़ीसद इस्राईलियों का मानना है कि ज़ायोनी शासन की अर्थव्यवस्था का भविष्य अधर में है।

55 फ़ीसद इस्राईलियों का मानना है कि ज़ायोनी शासन एक अलोकतांत्रिक शासन है। 60 फ़ीसद का मानना है कि ज़ायोनी शासन में भ्रष्टाचार की जड़ें बहुत गहरी हैं। 55 फ़ीसद का कहना है कि ज़ायोनी समाज बुरी तरह से बंटा हुआ है, जो इस शासन के भविष्य के लिए एक बड़ा ख़तरा है।